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राष्ट्रीय हिंदी दिवस 2026 के अवसर पर संबोधन
नमस्कार!
आज राष्ट्रीय हिंदी दिवस के इस विशेष अवसर पर आप सभी को हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ
14 सितंबर हमारे लिए एक ऐतिहासिक दिन है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। इसी ऐतिहासिक निर्णय की स्मृति में प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है।
हिंदी केवल एक भाषा नहीं है। यह भारत की संस्कृति, साहित्य, परंपराओं और भावनाओं को जोड़ने वाला एक सशक्त माध्यम है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने भी पिछले वर्ष हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी को भारत की पहचान और संस्कारों की जीवंत धरोहर बताते हुए सभी भारतीय भाषाओं को समृद्ध बनाने का आह्वान किया था।
हिंदी की सुंदरता केवल इसकी मधुरता और सरलता में ही नहीं, बल्कि इसकी विविध भाषाओं और संस्कृतियों के सुंदर संगम में भी निहित है। हिंदी ने संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश, अरबी, फ़ारसी, तुर्की, अंग्रेज़ी तथा भारत की अनेक क्षेत्रीय भाषाओं से शब्दों और भावों को आत्मसात किया है। यही कारण है कि हिंदी एक ऐसी भाषा बन गई है, जिसमें भारत की अनेकता में एकता की भावना सहज रूप से दिखाई देती है।
आज हिंदी भारत की सीमाओं से आगे बढ़कर विश्व के विभिन्न देशों में लोगों को भारत की संस्कृति, साहित्य और विचारों से जोड़ रही है। हिंदी के वैश्विक प्रसार में भारतीय सिनेमा और संगीत का भी अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। भारतीय फिल्मों के संवाद, गीत और संगीत ने हिंदी को उन देशों तक पहुँचाया है, जहाँ हिंदी बोलने वालों की संख्या बहुत कम है, लेकिन हिंदी गीतों और फिल्मों के प्रति लोगों का विशेष आकर्षण है। किर्गिस्तान भी इसका एक सुंदर उदाहरण है। यहाँ भारतीय फिल्मों और गीतों ने लंबे समय से लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई है। “जिमी जिमी आजा आजा” जैसे लोकप्रिय हिंदी गीत और मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म डिस्को डांसर आज भी किर्गिस्तान में भारतीय संस्कृति और हिंदी की लोकप्रियता की पहचान माने जाते हैं।
भारत और किर्गिज़ गणराज्य के संदर्भ में भाषा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को मजबूत करने में हिंदी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
इसी दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल हुई हैं। किर्गिज़ राष्ट्रीय महाकाव्य ‘मानस’ का प्रोफ. रमाकांत द्विवेदी एवं प्रोफ. हेमचन्द्र पांडेय द्वारा हिंदी अनुवाद इस वर्ष एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में हमारे सामने आया है। भारतीय विद्वानों द्वारा किए गए इस अनुवाद से किर्गिज़ संस्कृति और उसकी महान महाकाव्य परंपरा हिंदी भाषी पाठकों तक पहुँच रही है। यह केवल एक साहित्यिक अनुवाद नहीं, बल्कि भारत और किर्गिस्तान की सभ्यताओं के बीच एक नया सेतु है।
मुझे विशेष प्रसन्नता है कि पिछले वर्ष 14 सितंबर को ही भारतीय दूतावास, बिश्केक के परिसर में नियमित हिंदी कक्षाओं का शुभारंभ किया गया था। पिछले एक वर्ष में हमारे हिंदी विद्यार्थियों ने जिस उत्साह, लगन और समर्पण के साथ हिंदी भाषा का ज्ञान प्राप्त कर रहे है, वह वास्तव में सराहनीय है।
हमारे विद्यार्थियों ने हिंदी को केवल कक्षा तक सीमित नहीं रखा है। उन्होंने दूतावास द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में हिंदी में प्रस्तुतियाँ देकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। हमारे लिए यह विशेष गर्व का विषय है कि उन्हें माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के किर्गिज़ गणराज्य आगमन के अवसर पर हिंदी भाषा में उनका स्वागत करने का अवसर भी प्राप्त हुआ , जिसकी माननीय प्रधानमंत्री जी ने भी सराहना की और उनका उत्साह वर्धन किया। यह उपलब्धि इस बात का सुंदर उदाहरण है कि भाषा किस प्रकार दो देशों के लोगों को और अधिक निकट ला सकती है।
हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी दूतावास द्वारा निबंध लेखन, कविता लेखन एवं कविता-पाठ प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें भारतीय मूल के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। मुझे विश्वास है कि इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी रचनात्मकता एवं भाषा-ज्ञान को अभिव्यक्त करने का अवसर मिलता है। मैं सभी विद्यार्थियों को उनके उत्साह, प्रतिभागिता एवं निरंतर प्रयासों के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ ।
मुझे विश्वास है कि भारतीय दूतावास, बिश्केक में हिंदी की यह यात्रा आने वाले वर्षों में और अधिक सशक्त होगी और हमारे किर्गिज़ मित्रों के माध्यम से भारत और किर्गिज़ गणराज्य के बीच मैत्री एवं सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करेगी।
आइए, इस हिंदी दिवस पर हम संकल्प लें कि हिंदी के साथ-साथ भारत की सभी भाषाओं और हमारी समृद्ध भाषाई विरासत का सम्मान करेंगे और उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक गर्व के साथ पहुँचाएँगे।
आप सभी को राष्ट्रीय हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
धन्यवाद।
जय हिंद!
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Last Updated: 15-10-2026
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